Friday, April 12, 2019

नीतीश नो फैक्टर और कन्हैया से मेरी कोई तुलना नहींः तेजस्वी

बिहार में राजद, कांग्रेस, रालोसपा, हम और वीआईपी का महागठबंधन लोकसभा के 40 सीटों पर भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को सीधी टक्कर दे रहा है. दोनों तरफ़ के उम्मीदवारों की भी घोषणा हो चुकी है.
लेकिन गठबंधन राजनीति के दबाव और व्यक्तित्वों के टकराव की वजह से कई क्षेत्र में मुक़ाबला सीधा नहीं है.
सीपीआई-सीपीएम जैसे बड़े वाम दलों का महागठबंधन से बाहर रह जाना विपक्ष के लिए कुछ सीटों पर भारी पड़ सकता है. बेगूसराय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, राजद के तनवीर हसन और सीपीआई के कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी से न केवल संघर्ष त्रिकोणीय हुआ है बल्कि यह देश की हॉट सीट्स में शुमार हो गया है.
ताज़ा परिदृश्य में राजद के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बीबीसी से लंबी बातचीत की और अपने गठबंधन की जीत के लिए पूरी तरह आश्वस्त दिखे.
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कोई फैक्टर मानने से इंकार किया. तेजस्वी को कन्हैया कुमार से अपनी तुलना भी पसंद नहीं है. प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश-
चर्चा है कि बेगूसराय से कन्हैया के जीतने से राजद नेतृत्व विशेषकर तेजस्वी की चमक राष्ट्रीय फलक पर मंद पड़ जाएगी. आपको क्या लगता है?
अभी कन्हैया कौन से पद पर हैं. वो जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं और तबसे वो इतने वोकल हो गए हैं. मतलब सांसद नहीं बनेंगे तो वो समाप्त हो जाएंगे क्या. ये बात समझने की ज़रूरत है. कुछ चर्चा हो इसलिए ऐसी बात विरोधी फैलाते हैं. आज तक बाल ठाकरे चुनाव लड़े थे क्या, मुख्यमंत्री रहे थे क्या, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में उनका गहरा प्रभाव था. ऐसे कई नेता हुए हैं जो परदे के पीछे रहे और उनका ग़ज़ब का फॉलोविंग भी रहा है. पद मिल जाने से कोई नेता नहीं हो जाता. मुझे नहीं पता कि मेरी उनसे तुलना क्यों कर रहे हैं. किस बात की तुलना जबकि उनसे मेरी कोई समानता नहीं है. हमारे और उनके काम करने में बहुत अंतर है.
बेगूसराय से सीपीआई से कन्हैया कुमार उम्मीदवार हैं. बीते
कन्हैया के नामांकन और जनसभा में जो भीड़ जुटी थी उससे तो यही लगता है कि कन्हैया भी कमज़ोर स्थिति में नहीं हैं?
हमारा मक़सद भाजपा को हराना है और हमलोग हराएंगे. हम सक्षम हैं. तनवीर हसन साहब वहां से चुनाव जीतने जा रहे हैं. हम सभा कर के आये थे. लोग एक पाँव पर खड़े हैं पार्टी को जिताने और लालू जी को न्याय दिलाने के लिए. जब सामाजिक न्याय, संविधान और भाईचारे पर ख़तरा होगा तो उस स्थिति में वहां की जनता जानती है कि सामाजिक न्याय की असली लड़ाई राजद ही लड़ती है.
चुनाव में महागठबंधन की लड़ाई नीतीश कुमार से है या नरेंद्र मोदी से?
आज नीतीश जी कोई फ़ैक्टर नहीं हैं. वे जहाँ हैं वहां की नाव भी डुबो देंगे. हमलोगों को इस बार भाजपा को जवाब देना है. एक भी वादा पूरा नहीं किया गया. इनको जनता अच्छी तरह से जवाब देगी.
अगर विपक्ष चुनाव में जीतता है तो पीएम कौन होग?
हमलोग तो कहीं रेस में हैं नहीं और न ही पलटू चाचा हैं. एक बात स्पष्ट है कि यह चुनाव किसी एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाने का चुनाव नहीं है. देश को बचाने का चुनाव है. राहुल गांधी हमें बतौर पीएम स्वीकार्य हैं.
दिनों ऐसा लग रहा था कि राजद उन्हें समर्थन कर सकता है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. क्यों?
कन्हैया के नाम की घोषणा महागठबंधन में सब कुछ तय हो जाने के बाद हुई थी. बेगूसराय सीट राजद की परंपरागत सीट रही है. यह सीट समाजवादियों का गढ़ रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद तनवीर साहब को क़रीब पौने चार लाख वोट मिले थे. बहुत कम अंतर से वो चुनाव हारे थे. इसके अलावा बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र के प्रमंडल स्तर के कार्यकर्ताओं का दबाव था कि तनवीर हसन साहब को ही पार्टी उम्मीदवार बनाए. वो पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं. उनमें कोई कमी हमें नज़र नहीं आती.

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