Monday, September 10, 2018

यहां रहनेवाले हर इंसान को क्यों ऑपरेशन करवाना पड़ता है

निया में किसी भी जगह रहने के लिए कुछ शर्तें होती हैं. कुछ क़ानूनी ज़िम्मेदारियों होती हैं. जैसे भारत में रहने के लिए हर भारतीय के पास आधार नंबर होना 'ज़रूरी' (मामला न्यायालय में) है. विदेशियों के पास यहां रहने के लिए अपने मुल्क का पासपोर्ट और भारत से वीज़ा मिलना ज़रूरी है.
लेकिन अंटार्कटिका में एक बस्ती ऐसी भी है जहां लंबे वक़्त के लिए रहना है तो अपनी अपेंडिक्स को ऑपरेशन कर के हटवाना ज़रूरी शर्त है.
अंटार्कटिका बेहद सर्द महाद्वीप है. यहां लोग कुछ महीनों के लिए ही रहते हैं. मगर, इस सर्द वीराने में भी इंसानों की कुछ बस्तियां आबाद हैं. ऐसी ही एक बस्ती है विलास लास एस्ट्रेलास.
ये अंटार्कटिका का वो इलाक़ा है जहां या तो रिसर्च के मक़सद से वैज्ञानिक रहते हैं, या फिर चिली की वायु सेना और थल सेना के जवान रहते हैं.
ज़्यादातर सैनिक यहां आते-जाते रहते हैं. लेकिन बहुत से वैज्ञानिक और सैनिक यहां लंबे समय से रह रहे हैं. वो यहां अपना परिवार भी साथ ले आए हैं. विलास लास एस्ट्रेलास की आबादी बमुश्किल सौ लोगों की होगी.
हालांकि यहां किसी बड़े गांव या छोटे शहर जैसी सुविधाएं नहीं हैं. फिर भी ज़रूरत के मुताबिक़ जनरल स्टोर, बैंक, स्कूल, छोटा-सा पोस्ट ऑफ़िस और अस्पताल बना दिए गए हैं.
स्कूलों में बच्चों को बुनियादी तालीम तो मिल जाती है, लेकिन अस्पतालों में इलाज बहुत ही सतही मिलता है. अंटार्कटिका में एक बड़ा अस्पताल है, लेकिन वो विलास लास एस्ट्रेलास गांव से एक हज़ार किलोमीटर दूर है.
रास्ते भर बर्फ़ के पहाड़ों से होकर गुज़रना पड़ता है. ये बड़ा अस्पताल भी शहर के किसी मल्टी स्पेशियालिटी अस्पताल जैसा नहीं है. बेस के अस्पताल में चंद ही डॉक्टर हैं और वो भी माहिर सर्जन नहीं हैं. इसीलिए किसी भी तरह की इमरजेंसी से बचने के लिए लोगों को अपेंडिक्स का ऑपरेशन करवाना ज़रूरी होता है.
यहां के लोगों की ज़िंदगी जितनी अद्भुत है, उससे भी ज़्यादा अद्भुत है ये जगह. अलग-अलग दिशाएं बताने वाले निशानों को देखकर ही अंदाज़ा हो जाता है कि ये जगह घनी आबादी से कितनी दूर है.
मिसाल के लिए बीजिंग यहां से क़रीब 17,501 किलोमीटर दूर है. ज़रूरत का सामान यहां सेना के विशाल हवाई जहाज़ अमरीकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के बनाए मालवाहक विमान सी-130 हर्क्यूलिस से लाया जाता है. आसपास के इलाक़ों में चलने के लिए  ट्रक और राफ़्टिंग बोट की ज़रूरत पड़ती है.
इस इलाक़े का औसत तापमान साल भर माइनस 2.3 सेल्सियस रहता है जो कि अंटार्कटिका के मुख्य इलाक़े के तापमान के मुक़ाबले काफ़ी गर्म है.
बर्फ़ की चट्टानों से लगी कुछ इमारतें भी हैं जिनके अंदर का तापमान बाहर के मुक़ाबले बेहतर होता है. बिल्डिंगों के अंदर सजावट भी बेहतर है. दीवारों पर कुछ ख़ास यादगार तस्वीरें लटकी दिख जाती हैं. इनमें एक तस्वीर मशहूर वैज्ञानिक स्टीफ़न हॉकिंग्स की भी लगी है.
सर्जियो क्यूबिलोस चिली के एयरफ़ोर्स बेस के कमांडर हैं. वो यहां क़रीब दो साल से अपनी पत्नी और बच्चे के साथ रह रहे हैं. हालांकि उनका परिवार कुछ दिन के लिए चिली लौट गया था, लेकिन ख़ुद सर्जियो दो साल से यहीं पर हैं.
अपने तजुर्बे के आधार पर वो कहते हैं कि यहां सर्दी का मौसम झेलना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि सर्दी में तापमान माइनस 47 डिग्री तक पहुंच जाता है. ऐसे में कई-कई दिन घर में ही क़ैद रहना पड़ता है.
वो कहते हैं कि अब तो उनके परिवार को भी यहां का मौसम झेलने की आदत हो चुकी है. वो अब ना सिर्फ़ मौसम का मज़ा लेते हैं बल्कि अन्य सैनिकों के परिवारों के साथ हैलोवीन जैसे त्यौहार भी मनाते हैं.
परिवार के साथ रहने वालों को एक और बात का ख़्याल रखने की सलाह दी जाती है. ख़ासतौर से सैन्य बेस में रहने वालों को हिदायत दी जाती है कि उनकी पत्नी गर्भवती ना हो क्योंकि मेडिकल सुविधा के अभाव में कोई भी बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है.
यहां पेंगुइन को इंसानों से ख़तरा नहीं है. वो बेख़ौफ़ घूमती हैं. लेकिन तापमान ज़्यादा गिरने पर मरती भी ख़ूब हैं. तापमान गिरने पर समुद्र में भी बर्फ़ जम जाती है.
सैन्य बेस से काफ़ी दूरी पर ऊंचाई वाले इलाक़े पर ट्रिनिटी नाम का एक रूसी चर्च है. बताया जाता है कि इसे रूस के एक रूढ़िवादी पादरी ने बनाया था.
विलास लास एस्ट्रेलास दुनिया का ऐसा हिस्सा है जहां किसी और ग्रह पर रहने का अनुभव किया जा सकता है. इसमें कोई शक नहीं कि यहां रहना एक चुनौती भरा काम है. लेकिन यहां रहने वालों को जिस तरह की ज़िंदगी का तजुर्बा होगा वो दुनिया के किसी और इंसान को नहीं हो सकता.
उत्तर कोरिया ने अपने 70वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान आयोजित सैन्य परेड के दौरान इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (आईसीबीएम) का प्रदर्शन नहीं किया है.
हालांकि अभी यह अस्पष्ट है कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने इस कार्यक्रम के दौरान कोई भाषण दिया था या नहीं.
उत्तर कोरिया के सैन्य हथियारों और परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को जानने के लिए परेड पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई थी.
कुछ विश्लेषकों ने उम्मीद जताई थी कि किम जोंग उन अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के साथ शिखर वार्ता के बाद अपने हथियारों का प्रदर्शन करना कम कर देंगे.
यदि इस परेड में उस आईसीबीएम का प्रदर्शन किया जाता जिसमें अमरीकी धरती तक मार करने की क्षमता है तो उसे उकसाने वाला कदम माना जाता.
न्यूज एजेंसी एएफपी ने इस परेड की कोई तस्वीर जारी नहीं की है. हालांकि उनका एक फ़ोटो जर्नलिस्ट इस परेड को कवर कर रहा था.
एनके न्यूज़ जिसके पास सरकारी टीवी से मिली तस्वीरें थीं, उन्होंने परेड में आईसीबीएम के नहीं शामिल किए जाने की पुष्टि की है.
जून में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की मौजूदगी में उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त बनाने को लेकर एक अज्ञात समझौते पर दस्तखत किए थे, लेकिन इसे पूरा करने के लिए कोई समयसीमा, इसकी रूपरेखा और प्रक्रिया तय नहीं की गई थी.
तब से दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत चलती रही, लेकिन हाल ही में अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की निर्धारित यात्रा आखिरी समय में रद्द कर दी गई और दोनों देशों ने एक दूसरे पर समझौता वार्ता में रुकावट डालने का आरोप लगाया.
हालांकि दोनों ने यह भी कहा कि वो विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
सियोल स्थित बीबीसी संवाददाता लौरा बिकर ने कहा कि यदि उत्तर कोरिया इस परेड में आईसीबीएम को प्रदर्शित करता तो इससे भविष्य में समझौता वार्ता की संभावना ख़त्म हो जाती.त्तर कोरिया में उनका सबसे बड़ा खेल आयोजन भी होना है जो पिछली बार 2013 में हुआ था.
बड़े स्तर पर होने वाला यह खेल आयोजन इस देश की अच्छी छवि के प्रचार के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है.
इस साल के आयोजन का नाम द ग्लोरियस कंट्री रखा गया है जिसमें उत्तर कोरिया के इतिहास से जुड़ी प्रतीकात्मक कहानियां बताई जाएंगी.
पिछले दो हफ़्तों से उपग्रहों से मिल रही तस्वीरों के मुताबिक इस वर्ष यह खेल बहुत बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है जो सितंबर के पूरे महीने में चलता रहेगा.
इससे पहले आयोजित खेल बहुत बड़े स्टेडियमों में लयबद्ध जिम्नास्टिक और तालमेल के साथ डांस के प्रदर्शन के साथ किए थे.
इन रंगारंग कार्यक्रमों के बहुत भव्य होने की उम्मीद है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने पहले कहा था कि इन खेलों में और इसकी तैयारी में बच्चों को भाग लेने के लिए बाध्य किया जाता है.
बताया जा रहा था कि इस परेड के लिए पिछले छह महीने से तैयारियां चल रही थीं. उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने इस परेड को "जीत का जश्न और देश की अर्थव्यवस्था के तेज़ी से होते विकास को दर्शाने वाला" क़रार दिया है.
कई विश्लेषकों का मानना है कि किम जोंग-उन ऐसी उपलब्धि चाहते हैं जो उनके पिता और दादा भी हासिल नहीं कर पाए- वो कोरिया के युद्ध की समाप्ति की घोषणा करना चाहते हैं.
ये युद्ध एक सैन्य समझौते के बाद 1953 में ख़त्म हो गया था. लेकिन कभी कोई शांति समझौता नहीं हुआ.
अमरीका के साथ बातचीत अटकने के बाद किम जोंग-उन ने इस हफ़्ते दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधिमंडल का अपने देश में स्वागत किया और कोरियाई प्रायद्वीप को "परमाणु-मुक्त कराने की अपनी प्रतिबद्धता" को दोहराया.
दक्षिण कोरिया के अधिकारियों के मुताबिक किम इस बात से परेशान हैं कि उनकी सकारात्मक कोशिशों पर दुनिया भरोसा नहीं कर रही है.
वो अमरीका के साथ रिश्ते बेहतर करने की इच्छा जता चुके हैं. वो जानते हैं कि ऐसा करने के लिए परमाणु निरस्त्रीकरण पहली शर्त है.
किम ट्रंप के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. ट्रंप भी ट्वीट कर जवाब दे चुके हैं कि "वो साथ मिलकर ये करने को तैयार हैं."
हालांकि इन कोशिशों की राह में अब भी एक बड़ा रोड़ा है. किम जोंग-उन उत्तर कोरिया के अबतक के सबसे खुले विचारों के नेता तो दिखना चाहते हैं, लेकिन वो दुनिया को अब भी उत्तर कोरिया का एक सीमित रूप ही दिखाना चाहते हैं. और विदेशी मीडिया को परेड के लिए आमंत्रित करना एक ऐसा ही क़दम है.

No comments:

Post a Comment